BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 10 SEPTEMBER 2018 – Aaj Ka Purusharth

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Om Shanti
10.09.2018

★【 आज का पुरूषार्थ】★

(आज बच्चों ने बाबा से पूछा … बाबा, आप सारी दुनिया की आत्माओं से एक समान प्यार करते हो या हम बच्चों से ज्यादा…?)

तो बाबा ने कहा… 
देखो बच्चे, मैं हूँ तो सभी का बाप ना…, इसलिए मैं सभी को एक समान प्यार करता हूँ…।

किन्तु मैं हूँ निराकार, जिस कारण मुझे कुछ एक आत्मायें ही भली-भान्ति पहचान, मेरे वर्से की अधिकारी बन पाती है … अर्थात् मुझे अपना बाप मान मुझसे पुत्र का रिश्ता निभा, मेरे गुणों और शक्तियों की मालिक बन जाती है।

देखो, गायन है ना कि ‘‘जो करेगा, सो बनेगा…’’ और यही drama का नियम है और जो मुझ समान बनता है, वो ही मुझसे मिलन मना पाता है, अन्यथा मिलना असम्भव है…।

देखो बच्चे, मैं बाप हूँ प्यार का सागर किन्तु सागर में से प्यार हर आत्मा यथाशक्ति ही भर पाती है…!

किन्तु मैं सबका बाप हूँ … इसलिए आप बच्चों को जो साकार रूप में हैं, उन्हें आप-समान बना सभी आत्माओं का कल्याण करता हूँ।

बच्चे, बाप (परमात्मा पिता) loveful के साथ-साथ lawful भी है और drama का यही नियम है कि ‘‘जो करेगा, सो बनेगा…’’ और ‘‘जो जैसे कर्म करेगा, वैसा फल पायेगा…’’ और इसी नियम के आधार पर drama चलता है।

मैं तो एक-समान ही सबको प्यार करता हूँ, किन्तु बच्चे लेने में नम्बरवार है…!

बाप का तो गायन ही एक का है … आप स्वयं ही स्नेह के धागे में पिरो मेरे समीप आते जाते हो और जितने मेरे समीप आते हो, उतना ही मेरे समान बन जाते हो।

आप बच्चे तो बाप को भी अपने प्यार में बांध लेते हो…।

अच्छा। ओम् शान्ति।

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