BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 1 MARCH 2018 – Aaj Ka Purusharth

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*Om Shanti*
*01.03.2018*

★【 *आज का पुरुषार्थ*】★

बाबा देख रहा है कि सभी बच्चों के एक ही बोल है कि मुझे तो बस बाबा चाहिए और कुछ नहीं…। फिर तो बच्चे इस पुरानी दुनिया से मन-बुद्धि को 100% बाहर निकालना पड़ेगा अर्थात् निमित्त बन कर्म-व्यवहार में आना पड़ेगा, ना की किसी भी प्रकार की खिंचावट की वजह से…।

यदि खिंचावट है … तो इच्छा है … इच्छा है तो और कुछ भी चाहिए अर्थात् मेरा-मेरा है इसलिए महीनता से checking करो।

देखो, बाबा यह नहीं कहता कि सबकुछ छोड़ दो…, परन्तु सबकुछ करते हुए उनसे न्यारे रहो।

न्यारे रहना मुश्किल लगता है…? तो फिर एक बार जो कार्य आपको अपनी तरफ खिंचता है, उसे छोड़ दो। पहले अपनी स्व-स्थिति की तरफ ध्यान दो, अपने आपको शक्तिशाली बना फिर निमित्त बन कार्य करो।

अभी powerful स्व-स्थिति की बहुत-बहुत ज़रूरत है, क्योंकि दुनिया में दिन-प्रतिदिन हर तरह का आर्कषण अर्थात् खिंचावट और समस्यायें बढ़नी ही है और यदि आपकी स्व-स्थिति powerful ना हुई, तो आप समझदार हो…!

और जो समय आप बच्चों ने किसी भी कारणवश व्यर्थ गँवा दिया, वह तो फिर नहीं आयेगा…, और वह आपके लिए कल्प-कल्प की नूँध हो गई।

परन्तु अभी फिर भी minor सा समय रहा है, अपना ऊँचा भाग्य बनाने का … फिर यह भी दोबारा नहीं मिलेगा।

फिर बताओ भगवान बाप की इतनी ऊँच पालना से भी आपने क्या प्राप्त किया…?

यदि आप कोई काम नहीं करोगे तो काम रूकेगा नहीं और जिस काम की ज़िम्मेवारी बाप की है, वह तो पहले से भी सुसज्जित ढंग से होगा क्योंकि त्रिकालदर्शी बाप आप बच्चों के ही कल्याण के निमित्त बना है।

बाप सारे हिसाब-किताब बहुत अच्छे ढंग से clear करवा स्थूल और सूक्ष्म ज़िम्मेवारी सम्भाल लेगा।

बस, एक तो मन-बुद्धि पर controlling power चाहिए, दूसरा बाप पर सम्पूर्ण निश्चय – यही आपकी विजय का आधार है।

बाबा ने कभी भी किसी भी आत्मा से गृहस्थी या कर्म छुड़वाया नहीं है। बस बाबा ने यही कहा कि पवित्र बनो, योगी बनो … क्योंकि कल्प के अन्तिम समय में पवित्रता और बाप की याद के बिना इस पुरानी दुनिया में केवल दुःख ही दुःख है।

इसलिए पवित्र और योगी बनने में यदि किसी भी तरह की कोई बाधा है। कोई भी आत्मा या कोई भी कार्य आपको आपके रास्ते में रूकावट स्वरूप बन जाता है तो उसे छोड़ने में आपके कल्याण के साथ-साथ उसका भी कल्याण समाया हुआ है। यह यज्ञ की आदि में पवित्रता की वजह से माताओं और कन्याओं ने घरों का त्याग किया क्योंकि वह त्याग उस समय अति आवश्यक था और वो ही त्याग उनका भाग्य बन गया।

किसी भी तरह का कोई बन्धन वा चिन्ता आत्मा को आगे बढ़ने नहीं देती। एक निश्चिन्त और निर्बंधन आत्मा ही उड़कर अपनी मंज़िल को प्राप्त कर सकती है। 
इसलिए check करो … फिर change करो।

अच्छा। ओम शान्ति।

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