BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 1 DECEMBER 2018 – Aaj Ka Purusharth

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Om Shanti
01.12.2018

★【 आज का पुरूषार्थ】★

स्वयं भगवान आकर थोड़े से थोड़े, उसमें भी थोड़े से बच्चों को विशेष पालना भी देता है और विशेष स्नेह, सहयोग और शक्ति भी…। 
फिर भी बच्चे नम्बरवार ही बनते हैं…!

जो बच्चे बाप की श्रीमत को 100% मन-बुद्धि में रखकर चलते हैं अर्थात् उनका केवल बाप ही संसार है … उन बच्चों का अपने ऊपर full attention है … और उन बच्चों का परिवर्तन भी speed से हो रहा है … अर्थात् वो बच्चे ही बाप-समान बच्चे बनते हैं … और वो बच्चे ही बाप के;
• मस्तकमणी,
• दिलतख्तनशीन, 
• नूरे-रत्न बच्चे हैं, 
• बाप की आशाओं को पूरा करने वाले बच्चे हैं…।

दूसरी तरफ; 
वो बच्चे हैं … जिनका भी अपनी तरफ attention हैं … इनको भी एक ही लगन है कि बाप-समान बनना ही है…। 
परन्तु कभी-कभी दुनिया में बुद्धि भी जाती, संस्कारों से भी हार जाते, अर्थात् बार-बार connection जोड़ने का अभ्यास करते हैं…, परन्तु फिर भी इन बच्चों से बाप को बहुत प्यार है, इसलिए यह बच्चे बाप के गले की माला अर्थात् सिमरणी माला के दाने बन जाते हैं…।

और फिर तीसरी तरफ… 
यह बच्चे जो हैं, वो पुरूषार्थ तो करने की इच्छा रखते हैं और चाहते भी यही है कि हम भी बाप-समान बनें…! परन्तु बहुत जल्दी ही हार खा लेते हैं…, क्यों…? 
क्योंकि दुनिया से वैराग्य नहीं है…! अभी भी बहुत सारी इच्छाएं हैं, दुनिया से ही प्राप्ति की इच्छा है … इस कारण भगवान् के द्वारा full सम्पन्न नहीं बन पाते … और इन बच्चों के एक ही बोल हैं कि सारा दिन थोड़े ना ही योग लग सकता है…!

परन्तु, योग क्या है…? 
योग है एक प्यार … जोकि हमें इस समय केवल एक बाप (निराकार शिव) से करना है, अर्थात् सब सम्बन्धों का सुख, वैभव, वस्तुओं का सुख केवल बाप से ही अनुभव करना है … और इस सुख, आनन्द, खुशी और संतुष्टता के आगे दुनिया से प्राप्त होने वाला सुख, मिट्टी के बराबर है…।

बस, थोड़ा-सा समय दृढ़तापूर्वक करना पड़ता है। जितना बाप को combined रखोगे, उतनी ही जल्दी प्राप्तियां शुरू हो जायेंगी, फिर तो सहज हो जायेगा…।

इसलिए, अब स्वयं ही स्वयं का निर्णय करो कि हमें कौन-से number में आना है…? 
अंत काल भी स्मृति में रखना, क्योंकि वो scene बहुत भयानक, हाहाकार वाला और full पश्चाताप वाला होगा…।

गृहस्थ में रहकर हर कार्य करना है, परन्तु 100% समर्पण बुद्धि अर्थात् न्यारा रहकर, करनकरावनहार की स्मृति में रहकर करना है…, फिर आपका ज़िम्मेवार बाप है…।

अच्छा। ओम् शान्ति।

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