BRAHMAKUMARIS Aaj Ka Purusharth 2 AUGUST 2019 – आज का पुरूषार्थ

Om Shanti
02.08.2019

★【आज का पुरूषार्थ】★

बाबा कहते हैं … देखो बच्चे, अब वो समय आ गया है कि आप कुछ एक बच्चों के संकल्प से पुरानी दुनिया का विधिपूर्वक परिवर्तन और नई दुनिया की स्थापना का कार्य होगा, अर्थात् सभी आत्मायें … चाहे वो अलौकिक हैं वा लौकिक दुनिया की…, सभी कल्प वृक्ष के अपने-अपने धर्म में नम्बरवार set होती जायेंगी … और उसी अनुसार सतयुग में आयेंगी…।

इसलिए, इस समय मैं आपका बाप, आपके संकल्पों को ठीक रीति चलाने का direction दे रहा हूँ, ताकि आप अपना कार्य सफलतापूर्वक सम्पन्न कर सको, अर्थात् सम्पूर्ण रूप से सम्पन्न हो, बिना विध्न के, अपना कार्य सफलतापूर्वक सम्पन्न करो…।

बाप आप बच्चों के एक-एक संकल्प को जानता है और उसे यह भी पता है कि जीवनमुक्त आत्मा ही सभी आत्माओं का कल्याण कर सकती है, अर्थात् जब तक आप स्वयं की, हर तरह की…, तन, मन, धन, सम्बन्ध-सम्पर्क की problem से बाहर नहीं निकलते, अर्थात् 100% निर्बन्धन बन सम्पन्न नहीं बन जाते, अर्थात् इच्छामुक्त नहीं बन जाते, अर्थात् 100% सन्तुष्ट आत्मा ही सभी आत्माओं के कल्याण के निमित्त बन सकती है…।

और साथ ही साथ एक ज्ञानवान, बुद्धिमान आत्मा ही विधिपूर्वक, युक्तियुक्त ढंग से अपना कार्य सम्पन्न कर सकती है। 
क्योंकि यह कार्य कोई छोटा-मोटा कार्य नहीं है … सभी आत्माओं को मुक्ति और जीवनमुक्ति का वर्सा देना है, वो भी नम्बरवार…।

बच्चे, बस अब बाप के एक-एक बोल पर निश्चय रखो।

इस समय आप तमोप्रधान दुनिया के according चलने वाली मन-बुद्धि की तरफ attention ना दे, बाप की बातों पर 100% निश्चय रख, खुशी-खुशी अर्थात् उमंग-उत्साह से आगे बढ़ो…।

आप बच्चों ने तो अभी तक त्याग और तपस्या ही की है, अब आपका बाप बस आपको आपकी seat पर set करने के बाद … तन, मन, धन, सम्बन्ध-सम्पर्क … किसी भी तरह की कोई भी problem आने ही नहीं देगा, क्योंकि आगे तो आनन्द ही आनन्द है…।

यह problems जो आपको अनुभव हो रही हैं, वो कुछ भी नहीं है। बस आपको अनुभवी मूर्त ही बना रही हैं … और साथ ही साथ, इस समय जो directions आपको बाप दे रहा है, उसे अपनी बुद्धि रूपी तिजोरी में सम्भाल लो, ताकि आप उसे आने वाले समय में सफलतापूर्वक use कर सको…।

अच्छा। ओम शांति।

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**IMPORTANT POINT*

*जीवनमुक्त आत्मा ही सभी आत्माओं का कल्याण कर सकती है, अर्थात् जब तक आप स्वयं की हर तरह की, तन, मन, धन, सम्बन्ध-सम्पर्क की problem से बाहर नहीं निकलते, अर्थात् 100% निर्बन्धन बन सम्पन्न नहीं बन जाते, अर्थात् इच्छामुक्त नहीं बन जाते, अर्थात् 100% सन्तुष्ट आत्मा ही सभी आत्माओं के कल्याण के निमित्त बन सकती है…।*

****This content is preferably for the regular students of Brahma Kumaris’ Institution.

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