BRAHMAKUMARIS Aaj Ka Purusharth 1 AUGUST 2019 – आज का पुरूषार्थ

Om Shanti
01.08.2019

★【आज का पुरूषार्थ】★

बाबा कहते हैं … बच्चे, सर्व समर्पण हो जाओ … अर्थात् आप बच्चों के पास जो कुछ भी है, सब (बुद्धि से) परमात्मा बाप को सौंप दो…।

मैं और मेरेपन में रहने वाली आत्मा ना ही ज्ञानी है … ना ही योगी … और ना ही धारणा स्वरूप बन सकती है।

यदि किसी भी आत्मा के अन्दर minor सा भी मैं और मेरापन है, तो बाप-समान बनना असम्भव है।

इसलिए बच्चे, मैं और मेरा … इसका त्याग करो…।

सूक्ष्म रीति स्वयं की checking करो और change करते जाओ … निमित्त बन कर्म-व्यवहार में आओ, तब ही आप कर्म के प्रभाव से बचे रह सकते हो…।

जब भी किसी तरह की ज़िम्मेवारी स्वयं की समझते हो तो आप उसमें फँस जाते हो … यदि उस कार्य की ज़िम्मेवारी कोई और सम्भाल लें, तो आप हल्के रह अन्य कार्य कर सकते हो…।

और यहाँ तो स्वयं भगवान, बाप बन, आप बच्चों की ज़िम्मेवारी उठाने आ गया…! 
फिर आपका कर्तव्य केवल बाप के कार्य में सहयोगी बनना ही है … और इतने बड़े कार्य में सहयोगी केवल ज्ञान स्वरूप … योग स्वरूप … और धारणा स्वरूप आत्मा ही बन सकती है…।

परमात्मा बाप के कार्य में सहयोगी आत्मा ही बाप-समान आत्मा है…।

जिस बच्चे को बाप पर 100% निश्चय है, वो ही सर्व समर्पण हो सकता है और बाप-समान बन सकता है…।

देखो बच्चे, इस समय बाप (परमात्मा शिव) केवल आप विशेष बच्चों के कल्याण के लिए ही आपको पढ़ाने आया है … बस आप बाप पर निश्चय रखो।

देखो, भक्ति में भी गायन है कि ‘‘भगवान के घर देर है, अन्धेर नहीं … जिस पर भगवान की नज़र है उसका कोई बाल भी बाँका नहीं कर सकता…’’ और यहाँ तो स्वयं भगवान आपका अपना बन गया … भला कभी बाप अपने सपूत बच्चों का अकल्याण देख सकता है क्या…? नहीं ना…!

फिर बाप पर निश्चय रखो और बाप की knowledge को महीनता से समझ स्वयं की checking कर, change होते जाओ…।

अभी आप बच्चों को परमात्मा बाप का full सहयोग है।

फिर तो हल्के रहो, खुश रहो और उमंग-उत्साह के साथ, बाप के संग रह, अपनी मंज़िल तक पहुँचो…।

जो बच्चा इस समय बाप पर 100% निश्चय रख सर्व समर्पण हो चल रहा है, उसका हर कार्य समय से पहले होगा और अत्यधिक कल्याणकारी भी … और जिस बच्चे के निश्चय में कमी है अर्थात् ‘एक बल – एक भरोसा’ नहीं है, उसका समय से पहले मंज़िल पर पहुँचना असम्भव है…।

अच्छा। ओम् शान्ति।

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**IMPORTANT POINT*

*मैं और मेरेपन में रहने वाली आत्मा ना ही ज्ञानी है … ना ही योगी … और ना ही धारणा स्वरूप बन सकती है…।*

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