BRAHMA KUMARIS MURLI 13 MAY 2018 : DAILY MURLI (HINDI)

Daily Murli Brahma Kumaris Hindi – Today Murli 13 May 2018

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13-05-18
प्रात:मुरली
ओम् शान्ति
”अव्यक्त-बापदादा”
रिवाइज: 10-11-83 मधुबन

मुख्य भाई-बहनों की मीटिंग के समय अव्यक्त बापदादा के उच्चारे हुए मधुर अनमोल महावाक्य

आज सर्व शक्तियों का सागर बाप शक्ति सेना को देख रहे हैं। हर एक के मस्तक बीच त्रिशूल अर्थात् त्रिमूर्ति स्मृति की स्पष्ट निशानी दिखाई देती है। शक्ति की निशानी त्रिशूल दिखाते हैं। तो हरेक त्रिशूलधारी शक्ति सेना हो ना। बापदादा और आप। यह त्रिमूर्ति सदा स्पष्ट रूप में रहती है वा कभी मर्ज, कभी इमर्ज होती है? बापदादा के साथ-साथ मैं श्रेष्ठ शक्तिशाली आत्मा हूँ, यह भी याद रहता है? इसी त्रिमूर्ति स्मृति से शक्ति में शिव दिखाई देगा। कई मन्दिरों में बापदादा के कम्बाइन्ड यादगार शिव की प्रतिमा के साथ उसी प्रतिमा में मनुष्य आकार भी दिखाते हैं। यह बापदादा का कम्बाइन्ड यादगार है। साथ-साथ शक्ति भी दिखाते हैं। तो इस त्रिमूर्ति स्मृति स्वरूप स्थिति से सहज ही साक्षात्कार मूर्त बन जायेंगे। अब सेवाधारी मूर्त, भाषण कर्ता मूर्त, मास्टर शिक्षक बने हो। अभी साक्षात मूर्त बनना है। सहज योगी बने हो लेकिन श्रेष्ठ योगी बनना है। तपस्वी बने हो, महातपस्वी और बनना है।

आजकल सेवा कहो, तपस्या कहो, पढ़ाई कहो, पुरुषार्थ कहो, पवित्रता की सीमा कहो, किस लहर में चल रही है, जानते हो? सहज योगी के “सहज” शब्द की लहर में चल रही है। लेकिन लास्ट समय के प्रमाण वर्तमान मनुष्य आत्माओं को वाणी की नहीं लेकिन श्रेष्ठ वायब्रेशन, श्रेष्ठ वायुमण्डल, जिससे साक्षात्कार सहज हो जाए इसी की आवश्यकता है। अनुभव भी साक्षात्कार समान है। सुनाने वाले तो बहुत है जिन्हों को सुनाते हो वो भी सुनाने में कम नहीं। लेकिन कमी है साक्षात्कार कराने की। वह नहीं करा सकते। यही विशेषता, यही नवीनता, यही सिद्धि आप श्रेष्ठ आत्माओं में है। इसी विशेषता को स्टेज पर लाओ। इसी विशेषता के आधार पर सभी वर्णन करेंगे कि हमने देखा, हमने पाया। हमने सिर्फ सुना नहीं लेकिन साक्षात बाप की झलक अनुभव की। फलानी बहन वा फलाना भाई बोल रहे थे, यह अनुभव नहीं। लेकिन इन्हीं द्वारा कोई अलौकिक शक्ति बोल रही थी। जैसे आदि में ब्रह्मा को साक्षात्कार हुआ विशेष शक्ति का, तो क्या वर्णन किया! यह कौन था, क्या था! ऐसे सुनने वालों को अनुभव हो कि यह कौन थे? सिर्फ प्वाइंट्स नहीं सुनें लेकिन मस्तक बीच प्वाइंट आफ लाइट दिखाई दे। यह नवीनता ही सभी की पहचान की आंख खोलेगी। अभी पहचान की आंख नहीं खुली है। अभी तो दूसरों की लाइन में आपको भी ला रहे हैं। जैसे यह-यह हैं वैसे यह भी हैं। जैसे वह भी यह कहते हैं वैसे यह भी कहते हैं। यह भी करते हैं। लेकिन यह वो ही हैं जिसका हम आह्वान करते हैं, जिसका इन्तजार कर रहे हैं। अभी इस अनुभूति की आवश्यकता है। इसका साधन है सिर्फ एक शब्द को चेन्ज करो। सहज योगी की लहर को चेन्ज करो। सहज शब्द प्रवृत्ति में नहीं यूज़ करो। लेकिन सर्व सिद्धि स्वरूप बनने में यूज़ करो। श्रेष्ठ योगी की लहर, महातपस्वी मूर्त की लहर, साक्षात्कार मूर्त बनने की लहर, रूहानियत की लहर, अब इसकी आवश्यकता है। अब यह रेस करो। सन्देश कितनों को दिया, यह तो 7 दिन के कोर्स वालों का काम है। वो भी यह सन्देश दे सकते हैं। लेकिन यह रेस करो – अनुभव कितनों को कराया। अनुभव कराना है, अनुभवी बनाना है। यह लहर अभी चारों ओर होनी चाहिए। समझा।

84 का साल आ रहा है। 84 घण्टों वाली शक्ति मशहूर है। सभी देवियों की महिमा है। 84 में घण्टा तो बजायेंगे ना तब तो गायन हो, 84 का घण्टा है। अभी आदि-समान साक्षात्कार की लहर फैलाओ। धूम मचाओ। आप साक्षात बाप बनो तो साक्षात्कार आप ही हो जायेगा। अभी थोड़ा-थोड़ा अनुभव करते हैं लेकिन यह चारों ओर लहर फैलाओ। जैसे मेले की भी लहर फैलाते हो ना? मेले बहुत किये हैं, समारोह भी बहुत किये। अभी मिलन समारोह मनाओ। नये साल के लिए नया प्लैन बनाने आये हो। सबसे पहला प्लैन स्वयं को सर्व कमजोरियों से प्लेन बनाओ, तब तो साक्षात्कार होगा। अगर इस मीटिंग में यह प्लैन प्रैक्टिकल में आ जाए तो सेवा आपके चरणों में झुकेगी। अभी बापदादा की यह आश पूरी करनी है। आश अभी पूरी हुई नहीं है। मीटिंग तो हो जाती है। बापदादा के पास चार्ट तो सबका है ना। सिर्फ रिगार्ड रखने के कारण बापदादा कहते नहीं हैं। अच्छा – आज तो थोड़ा मिलने आये हैं, चार्ट बताने नहीं आये हैं। (दादी को) आपकी सखी (दीदी) कहाँ है? गर्भ में? निमित्त गर्भ में है लेकिन अभी भी सेवा की परिक्रमा दे रही है। जैसे ब्रह्मा बाप के साथ साकार स्वरूप में जगत अम्बा के बाद साथी रही। वैसे अभी भी अव्यक्त ब्रह्मा के साथ है। सेवा में साथीपन का पार्ट बजा रही है। निमित्त कर्मेन्द्रियों का बन्धन है लेकिन विशेष सेवा का बन्धन है। जैसे यज्ञ की स्थापना की कारोबार पहले विशेष रूप में जगत अम्बा ने सम्भाली। जगत अम्बा के बाद विशेष निमित्त रूप में इसी आत्मा (दीदी) की जवाबदारी रही। साथी भले और भी रहे लेकिन विशेष स्टेज पर और साकार ब्रह्मा के साथ पार्ट में रही। अभी भी ब्रह्मा बाप और दीदी की आपस में रूहरिहान, मनोरंजन और सेवा के भिन्न-भिन्न पार्ट चलते रहते हैं। नई सृष्टि की स्थापना में भी विशेष ब्रह्मा के साथ-साथ अनन्य आत्माओं का अभी जोर-शोर से पार्ट चल रहा है! जैसे साकार दीदी के विशेष संस्कार, सेवा के प्लैन को प्रैक्टिकल में लाने का, उमंग-उत्साह दिलाने का रहा। वैसे अभी भी वो ही संस्कार नई दुनिया की स्थापना के कार्य के अर्थ निमित्त बने हुए ग्रुप को और तीव्रगति देने का पार्ट चल रहा है। दीदी का विशेष बोल याद है? उमंग-उत्साह में लाने के लिए विशेष शब्द क्या थे? हमेशा यही शब्द रहे कि कुछ और नया करो। अभी क्या हो रहा है? बार-बार पूछती थी, नवीनता क्या लाई है? ऐसे भी अव्यक्त ब्रह्मा से बार-बार इसी शब्दों से रूहरिहान करती थी। एडवान्स पार्टी में भी उमंग-उत्साह ला रही है। अभी तक क्या क्या किया है, क्या हो रहा है। वो ही संस्कार प्रैक्टिकल में ला रही है। किसको भी बैठने नहीं देती थी ना। एडवान्स पार्टी को भी अभी स्टेज पर लाने का बाण भर रही है। कन्ट्रोलर के संस्कार थे ना। अभी एडवान्स पार्टी का कन्ट्रोलर है। सेवा के संस्कार अभी भी इमर्ज रूप में है। समझा! अभी दीदी कहाँ है? अभी तो विश्व का चक्कर लगा रही हैं। जब सीट ले लेंगी तो बता देंगे। अभी वह भी आपको सहयोग देने के बहुत बड़े-बड़े प्लैन्स बना रही है। अभी देरी नहीं लगेगी। अच्छा।

ऐसे सदा श्रेष्ठ योगी, सदा महान तपस्वी मूर्त, साक्षात बाप बन बाप का साक्षात्कार कराने वाले चारों ओर “हमने पाया हमने देखा” इस प्राप्ति की लहर फैलाने वाले, ऐसे महान तपस्वी मूर्तों को देश-विदेश के सर्व स्नेही सेवा में मग्न रहने वाले सर्व बच्चों को बापदादा का याद-प्यार और नमस्ते।

मीटिंग वालों से:-

मीटिंग तो हो ही गई। मीटिंग होती है, विश्व को बाप के समीप लाने के लिए। सिर्फ सन्देश देने के लिए नहीं। समीप लाने के संग का रंग लगता है ना। जितना बाप के समीप आते हैं उतना संग का रंग लगता है। जहाँ सुनना है वहाँ कुछ सुनना होता – कुछ भूलना होता लेकिन जो समीप आ जाते वो बाप के समीप होने से रूहानी रंग में रंगे रहते हैं। तो अभी क्या सेवा है? समीप लाने की। सन्देश तो दे दिया। मैसेन्जर बनके मैसेज देने का पार्ट तो बजाया। लेकिन अभी क्या बनना है? शक्तियों को सदैव किस रूप में याद करते हैं? सब शक्ति सेना हो ना! शक्तियों को हमेशा माँ के रूप में याद करते हैं, पालना लेने के संकल्प से याद करते हैं। मैसेज तो बहुत दिया और अभी और भी देने वाले तैयार हो गये, अभी चाहिए पालना वाले। जो विशेष निमित्त हैं उन्हों का कार्य अभी हर सेकण्ड बाप की पालना में रहना और सर्व को बाप की पालना देना। जैसे छोटे बच्चे होते हैं तो सदा पालना में रहने के कारण कितने खुश रहते हैं। कुछ भी हो लेकिन पालना के नीचे होने के कारण कितने खुश रहते हैं। ऐसे आप सभी सर्व आत्माओं को प्रभु पालना के अन्दर चलने का अनुभव कराओ। वह समझें कि हम प्रभु की पालना के अन्दर चल रहे हैं। यह हमें प्रभु के पालना की दृष्टि दे रहे हैं। तो अभी पालना की आवश्यकता है। तो पालना करने वाले हो या मैसेन्जर हो? मैसेन्जर तो आजकल बहुत कहलाने लग पड़े हैं। मैसेन्जर बनना बहुत कामन बात है। लेकिन अभी जो भी आयें वह ऐसे अनुभव करें कि हम ईश्वरीय पालना के अन्दर आ गये। इसी को ही कहा जाता है सम्बन्ध में लाना।

सभी अनन्य हैं ना। अनन्य अर्थात् जो अन्य न कर सकें वह करके दिखाने वाले। जो सब करते वो ही किया तो बड़ी बात नहीं। पालना का अर्थ है उन्हों को शक्तिशाली बनाना, उन्हों के संकल्पों को, शक्तियों को इमर्ज करना, उमंग-उत्साह में लाना। हर बात में शक्ति रूप बनाना। इसी रूप की पालना अब ज्यादा चाहिए। चल रहे हैं, लेकिन शक्तिशाली आत्मायें बनकर चलें वो अभी आवश्यक है। जो कोई नये भी आवें तो ईश्वरीय शक्ति की अनुभूति जरूर करें। वाणी की शक्ति की अनुभूति तो हो रही है लेकिन यहाँ ईश्वरीय शक्ति है, वह अनुभव कराओ। स्टेज पर आते हो तो याद रहता है – भाषण करना है, लेकिन यह ज्यादा याद रहे, भाषण निमित्त है, ईश्वरीय शक्ति की भासना देनी है। वाणी में भी ईश्वरीय शक्ति की भासना आवे। इसको कहा जाता है न्यारा-पन। स्पीच बहुत अच्छी की तो यह स्पीकर के रूप में देखा ना। यह ईश्वरीय अलौकिक आत्मायें हैं, इस रूप में देखें। यह महसूसता करानी है। यह भासना ही ईश्वरीय बीज डाल देती है। फिर वह बीज निकल नहीं सकता। एक सेकण्ड का भी किसको अनुभव हो जाता है तो वह अन्त तक मेहनत नहीं लेता। ईश्वरीय झलक का अनुभव जिसने आते ही किया उनका चलना, सेवा करना वह और होता है। जो सिर्फ सुनकर प्रभावित होते उनका चलना और होता है, जो सिर्फ प्यार में ही चलते रहते उनका चलना और है। भिन्न-भिन्न प्रकार हैं ना। तो अभी पहले स्वयं को सदा ईश्वरीय पालना में अनुभव करो तब औरों को अनुभव हो। सेवा में चल रहे हैं लेकिन सेवा भी पालना है। ईश्वरीय पालना में चल रहे हैं। सेवा शक्तिशाली बनाती है तो यह भी ईश्वरीय पालना है ना। लेकिन यह इमर्ज रहे। यह दृढ़ संकल्प करना चाहिए। अनन्य अर्थात् बाप समान सैम्पल। अच्छा-

विदेशी बच्चों को याद-प्यार देते हुए

सभी डबल विदेशी बच्चों को विशेष याद प्यार बापदादा पदमगुणा रिटर्न में दे रहे हैं। सभी ने जो भी पत्र और समाचार लिखे हैं उसके रिटर्न में सभी बच्चों को पुरुषार्थ तीव्र करने की मुबारक हो और साथ-साथ पुरुषार्थ करते अगर कोई साइडसीन आ जाती है तो उसमें घबराने की कोई बात नहीं है। जो भी साइडसीन आती है उसको याद और खुशी से पार करते चलो। विजय वा सफलता तो आप सबका जन्मसिद्ध अधिकार है। साइडसीन पार किया और मंजिल मिली इसलिए कोई भी बड़ी बात तो छोटा करने के लिए स्वयं बड़े ते बड़ी स्टेज पर स्थित हो जाओ तो बड़ी भी बात स्वयं छोटी स्वत: हो जायेगी। नीचे की स्थिति में रहकर और ऊपर की चीज को देखते हो तब बड़ी लगती है। तो ऊंची स्टेज पर स्थित होकर के किसी भी बड़ी चीज को देखो तो छोटी अनुभव होगी। जब भी कोई परिस्थिति आती है या किसी भी प्रकार का विघ्न आता है तो अपनी श्रेष्ठ स्थिति में, ऊंचे ते ऊंची स्थिति में स्थित हो जाओ। बाप के साथ बैठ जाओ तो बाप के संग का रंग भी सहज लग जायेगा। साथ भी मिल जायेगा। और ऊंची स्टेज के कारण सब बातें बहुत छोटी-सी अनुभव होंगी, इसलिए घबराओ नहीं। दिलशिकस्त नहीं हो लेकिन सदा खुशी के झूले मे झूलते रहो तो सदा ही सफलता आपके सामने आयेगी। सफलता मिलेगी या नहीं यह सोचना भी नहीं पड़ेगा। लेकिन सफलता स्वयं ही आपके सामने आयेगी। प्रकृति सफलता का हार स्वयं ही पहनायेंगी। परिस्थिति बदलकर विजय का हार हो जायेगी इसलिए बहुत हिम्मत वाले हैं, उमंग वाले हैं, उत्साह में रहने वाले हैं, यह बीच-बीच में थोड़ा-सा होता भी है तो उसको सोचो नहीं। समय बीत गया, परिस्थिति बीत गई फिर उसका सोचना व्यर्थ हो जाता है इसलिए जैसे समय बीत गया वैसे अपनी बुद्धि से भी बीती सो बीती, जो बीती सो बीती करते हैं वह सदा ही निश्चिन्त रहते हैं। सदा ही उमंग-उत्साह में रहते हैं इसलिए बापदादा विशेष ऐसे उमंग-उत्साह में रहने वाले, हिम्मत वाले बच्चों को विशेष अमृतवेले याद करते हैं। और विशेष शक्ति देते हैं, उसी समय अपने को पात्र समझ वह शक्ति लेंगे तो बहुत ही अच्छे अनुभव होंगे।

अमृतवेले सुस्ती आ जाती है:- खुशी की प्वाइन्ट का मनन कम करते हैं। अगर मनन सारा दिन चलता रहे तो अमृतवेले भी वही मनन किया हुआ खजाना सामने आने से खुशी होगी तो सुस्ती नहीं आयेगी। लेकिन सारा दिन मनन कम होता है उस समय मनन करने की कोशिश करते हैं तो मनन नहीं होता है क्योंकि बुद्धि फ्रेश नहीं होती है। फिर न मनन होता, न अनुभव होता, फिर सुस्ती आती है। अमृतवेले को शक्तिशाली बनाने के लिए सारे दिन में भी श्रीमत मिलती है उसी प्रमाण चलना बहुत आवश्यक है। तो सारा दिन मनन करते चलो। ज्ञान रत्नों से खेलते चलो तो वही खुशी की बातें याद आने से नींद चली जायेगी और खुशी में ऐसे ही अनुभव करेंगे जैसे अभी प्राप्ति की खान खुल गई। तो जहाँ प्राप्ति होती हैं वहाँ नींद नहीं आती है। जहाँ प्राप्ति नहीं वहाँ नींद आती वा थकावट होती है वा सुस्ती आती है। प्राप्ति के अनुभव में रहो, उसका कनेक्शन है सारे दिन के मनन पर। अच्छा!

जिन्होंने भी याद-प्यार का सन्देश भेजा है उन्हों को सम्मुख तो मिलना ही है लेकिन अभी जो भी दूर बैठे भी बापदादा सम्मुख देख रहे हैं और सम्मुख देखकर ही बात कर रहे हैं। अभी भी सम्मुख हो फिर भी सम्मुख रहेंगे। सभी को नाम सहित, समाचार के रेस्पान्ड सहित याद-प्यार। सदा तीव्र उमंग, तीव्र पुरुषार्थ में रहना है और औरों को भी तीव्र पुरुषार्थ के वायब्रेशन देते हुए वायुमण्डल ही तीव्र पुरुषार्थ का बनाना है। पुरुषार्थ नहीं, ‘तीव्र पुरुषार्थ’। चलने वाले नहीं, उड़ने वाले। चलने का समय पूरा हुआ अब उड़ो और उड़ाते चलो। अच्छा!

वरदान:- भाग्य की नई-नई स्मृतियों द्वारा पुरुषार्थ में रमणीकता का अनुभव करने वाले मन दुरुस्त भव 
ब्राह्मण जीवन में लास्ट जन्म होने के कारण शरीर से चाहे कितने भी कमजोर या बीमार हैं, लेकिन मन सबका दुरुस्त है। उमंग-उत्साह से उड़ने वाला है। पावरफुल मन की निशानी है – सेकण्ड में जहाँ चाहे वहाँ पहुंच जाए। इसके लिए सदा अपने भाग्य के गीत गाते उड़ते रहो। अमृतवेले से भाग्य की नई-नई बातें स्मृति में लाओ। कभी किसी प्राप्ति को सामने रखो, कभी किसी … तो पुरुषार्थ में रमणीता आ जायेगी। बोर नहीं होंगे, नवीनता का अनुभव करेंगे।
स्लोगन:- आगे पीछे सोच समझकर हर कर्म करो तो सफलता प्राप्त होती रहेगी।

1 thought on “BRAHMA KUMARIS MURLI 13 MAY 2018 : DAILY MURLI (HINDI)”

  1. Main Bastar se hoon
    Baba mujhe kripa bataiye
    Bastar mn naxalism ka jog hum adivasiyon ke sath kyon lag gya
    Hum ismen kyon phase huyen hai nark mn
    Iska solutions bataiye

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