Brahmakumaris Daily Mahavakya 10 September 2017

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10.09.2017
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ओम् शान्ति ।

बच्चे, स्व-परिवर्तन ही विश्व-परिवर्तन का आधार है । स्व-परिवर्तन अर्थात् अपने स्वभाव-संस्कार को परिवर्तन कर बाप-समान बना लेना और जैसे-जैसे आपका स्वभाव-संस्कार परिवर्तन होगा, वैसे-वैसे आपके सम्बन्ध-सम्पर्क में आने वाली आत्मायें आपकी सहयोगी बन जायेगी, और सहयोगी बनते-बनते योगी बन जायेगी। इसलिए अपने संकल्पों पर और बोल पर अटेन्शन रखो । बच्चे स्व को परिवर्तन करने का तीव्र पुरूषार्थ अर्थात् फुुल अटेन्शन रख रहे हैं पर जब भी आपका कोई पुराना स्वभाव-संस्कार बाहर निकल कर आता है तो बच्चे भारी हो जाते हैं और सोचते हैं कि इतना समय हो गया अभी तक पूरा परिवर्तन हुआ नहीं है…!

परन्तु बच्चे, आप भारी ना हो किन्तु अपनी चेकिंग करो की पहले से कितने परसेन्ट चेन्ज हुआ है…?

जब तक सम्पूर्ण रीति सफाई नहीं होती है तब तक यह पेपर के रूप में आयेंगे ही, परन्तु आप बच्चों को उस समय अपनी मन-बुद्धि को युक्ति-युक्त ढंग से चलाना है, इसके लिए एक तो स्वयं के मालिक बनो और दूसरा शिव बाप को अपने संग रखो ।

देखो जब भी कोई बीमारी आती है तो उसका अच्छी तरह से इलाज किया जाता है नाकि सोच-सोच कर समय वेस्ट किया जाता है ।

पुराना हिसाब-किताब किसी भी रूप में आना अर्थात् हिसाब-किताब क्लीयर होना या अपनी मंज़िल के समीप पहुँचना, इसलिए खुशी-खुशी अपनी मन-बुद्धि को समझानी दे अपने पुरूषार्थ को तीव्र करो ।

दिलशिकस्त वा भारी हो अपना समय व्यर्थ मत करो । बल्कि अपना अटेन्शन बढ़ा हाई जम्प दो । यह बिल्कुल अन्तिम पेपर चल रहे हैं इसलिए हर पेपर में पास होना है, पास होने वाले आगे बढ़ जाते है और फेल होने वाले पीछे, इसलिए 100 परसेन्ट अटेंशन रख नाॅलेजफुल और पाॅवरफुल बन कम से कम समय में अर्थात् सेकण्ड में फुल-स्टाॅप लगा पेपर क्राॅस कर लो ।

जितना बिन्दु बनने का अभ्यास होगा, उतनी जल्दी बिन्दु लग जायेगा । बस, पुरूषार्थ करते रहो । विजय तो होनी ही है ।

अच्छा । ओम् शान्ति ।

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