BRAHMAKUMARIS Aaj Ka Purusharth 21 MAY 2019 – आज का पुरूषार्थ

Om Shanti
21.05.2019

★【 आज का पुरूषार्थ】★

बाबा कहते हैं … बच्चे, मैं आप सब बच्चों को लेकर जाने के लिए आया हूँ…, परन्तु मैं आपको तभी लेकर जा सकता हूँ जब आप अपनी सारी स्थूल और सूक्ष्म ज़िम्मेवारी कहो, इच्छा कहो, संकल्प कहो, से न्यारे नहीं हो जाते…, अर्थात् इस पुरानी दुनिया से न्यारे नहीं हो जाते…।

इसलिए मैं बार-बार कहता हूँ – बच्चे, मेरे प्यार में समा जाओ … खो जाओ … अर्थात् 100% समर्पण हो जाओ…।

बच्चों की इच्छा भी यही है कि हम बाप के संग जल्दी से जल्दी जाए … परन्तु फिर भी बार-बार स्वयं को किसी-न-किसी संकल्प से बाँध लेते हैं…!

देखो बच्चे, आप स्वयं के संकल्पों पर attention देकर ही इस दुनिया से न्यारे हो सकते हो।

न्यारे होने के लिए ही बाबा ने कई अभ्यास बताए हैं;
• हर बात बाप को दे दो,
• अर्थात् सबसे पहले बाप से share करो,
• फिर भी उसके संकल्प आयें, तो attention दे स्वयं के उच्चतम् स्वमान में अर्थात् अपने इस पुराने जीवन से न्यारे हो, जो बाप ने आपको नए-नए उच्चतम् स्वमान दिए हैं, उसकी स्मृति में स्थित हो जाओ।

उस स्वमान के according अपनी मन्सा-वाचा-कर्मणा रखो अर्थात् साधारणता में भी विशेषता ले आओ…।

जब बाप आप बच्चों की 100% guarantee ले रहा है, फिर आप निश्चिन्त रहो ना…!

देखो, आपके इस दुनिया से न्यारे होते ही मैं आपको अपने समान बना … आपकी स्थूल और सूक्ष्म सारी ज़िम्मेवारियाँ आप द्वारा ही पूरी करवा, विश्व-परिवर्तन का कार्य आप द्वारा ही पूरा करवाऊँगा…।

बस, आप एक छोटे बच्चे की तरह मुझ पर समर्पण हो जाओ…।

बाबा बार-बार कह रहा है कि बाबा ने बच्चों को मौज में रखा है, तो आगे भी मौज में ही रखेगा … यह छोटी-छोटी सी परिस्थितियाँ बस आपको परिपक्व बनाने के लिए ही आ रही है। 
इसलिए इनका मन्थन मत करो…। 
मन्थन करने से परिस्थितियों के vibrations फैलते हैं, जोकि आपको और आपके सम्पर्क में आने वाली आत्माओं को, और भारी कर देते हैं…!

और जबकी आप ज़िम्मेवार आत्मा हो तो आपके हल्के होने पर ही सभी आत्मायें हल्की होंगी।

कोई बड़ी से बड़ी बात जो आप समझते हो कि यह बड़ी बात है वो सुनकर कोई जल्दी से, और संकल्प ना चला अपने उच्चतम् स्वमान में स्थित हो बाप को वह बात सुना, हल्के हो सामने आने वाली आत्मा को हल्का कर दो…।

आपके positive संकल्प ही आपकी परिस्थितियों को हल्का कर देंगे और बाप तो आपके संग है ही … वह क्या नहीं कर सकता…! 
परन्तु इस समय मैं केवल आप बच्चों को ही तैयार कर रहा हूँ और आप परिस्थितियों को cross कर अर्थात् परिास्थितियों के समय भी हल्का रहकर ही स्वयं को सम्पन्न बना सकोगे…।

बस बच्चे, बाप पर निश्चय रख आगे से आगे बढ़ो…।

अच्छा। ओम् शान्ति।

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