BRAHMAKUMARIS Aaj Ka Purusharth 21 JUNE 2019 – आज का पुरूषार्थ

Om Shanti
21.06.2019

★【 आज का पुरूषार्थ】★

बाबा कहते हैं…
• योग क्या है…? 
योग है एक प्यार … जोकि हमें इस समय केवल एक बाप (परमात्मा शिव) से करना है, अर्थात् सब सम्बन्धों का सुख, वैभव, वस्तुओं का सुख केवल बाप से ही अनुभव करना है … और इस सुख, आनन्द, खुशी और संतुष्टता के आगे दुनिया से प्राप्त होने वाला सुख, मिट्टी के बराबर है…।

• योग…, अर्थात् आत्मा और परमात्मा का प्यार भरा सम्बन्ध और बाप द्वारा सर्व गुणों और शक्तियों की प्राप्ति…।

• योग…, अर्थात बाप की याद से, बाप से गुण और शक्तियाँ ले, अपने original स्वरूप में स्थित होना…

• देखो, यथार्थ ज्ञान से ही यथार्थ योग लगता है। जिसके द्वारा ही स्व-परिवर्तन सो वायुमण्डल परिवर्तन सो विश्व-परिवर्तन होता है।

• कई बार कर्म करते भी आपका powerful connection बाप के साथ होता है, परन्तु आप अनुभव नहीं कर पाते…, और यही सोचते हो कि बैठकर तो योग किया नहीं…! बैठकर योग लगाना बहुत-बहुत-बहुत अच्छा है, परन्तु कर्मयोगी की stage भी कम नहीं…।

• बस इसमें कर्म consicous होने के बजाए कर्मयोगी अर्थात् स्वयं को आत्मा समझ, बाप के साथ combined रहने का बहुत अभ्यास चाहिए। योग के साथ-साथ स्वयं के परिवर्तन पर full attention रखना है।

• अभी भी बच्चे बीच-बीच में मूँझ जाते हैं और सोचते हैं, सारा दिन योग थोड़े ना ही लग सकता है…! देखो बच्चे, कौन कहता है सारा दिन योग लगाओ…? बाप तो केवल यही कहता है … बच्चे, परमात्मा से सर्व सम्बन्धों के सुख का अनुभव करो…। समीप सम्बन्ध को निभाने में सोचना नहीं पड़ता कि कैसे निभाएं…?

• लौकिक में तो सभी सम्बन्ध स्वार्थ वश हैं, चाहे तो एक percent, चाहे तो 100 percent … परन्तु परमात्मा बाप तो आप बच्चों के साथ सभी सम्बन्ध निःस्वार्थ निभाता है…।

• बच्चे, हर कर्म को बड़े प्रेमपूर्वक, शान्ति से और बाप के संग रहकर करना है। किसी भी कार्य में जल्दबाज़ी या हड़बड़ी नहीं करनी…। यह नहीं सोचना कि जल्दी से कार्य खत्म हो और मैं योग में बैठूँ…!

• बैठकर योग लगाना बहुत अच्छा है, परन्तु उससे भी ज्यादा ज़रूरी है हर second अपनी स्थिति में रहना अर्थात् बाप के साथ रह और अपने स्वमान की स्मृति में रहकर कार्य करना…।

• और आप बच्चे जब बाप की याद में रहकर कर्म करते हो तो आपकी double कमाई हो जाती है – एक मंसा और एक कर्मणा…।

• इसी तरह, जब आप बाप की याद और स्वमान में स्थित होकर बात करते हो, तब भी double कमाई हो जाती है – इसे कहते हैं हर कदम में पदम…।

• चारों ही subjects का result जो हैं, वह गुण स्वरूप और शक्ति स्वरूप बन seat पर set होना है। इसलिए आप बच्चों को इस तरफ विशेष attention देना है।

• आप बच्चों को विशेष ध्यान रखना है कि चाहे योग के लिए, चाहे धारणा के लिए अपने मूल स्वरूप एवं स्थिति से नीचे नहीं आना है…।

• देखो, आप बच्चों के लिए ही यह सहजयोग, कर्मयोग, निरन्तर योग और राजयोग मशहुर है। यह सहज से सहज योग है…। जहाँ मर्ज़ी, जिस मर्ज़ी स्थिति में आप बाप को याद कर सकते हो। कर्म करते वक्त भी बाप को याद करो … और यही निरन्तर योग होने से राजयोग सहज हो जाता है…।

• और अब इस अभ्यास को बढ़ाते चलो, फिर naturally ही आप स्वयं के और बाप के स्मृति स्वरूप हो जाओगे…। इसलिए, बाबा बार-बार कहता है कि ज्यादा सोचो मत, बस हर पल मुझे याद करते रहो…।

• यह पढ़ाई ही है मनुष्य से देवता अर्थात् तमोगुणी आत्मा को परिवर्तन कर सतोगुणी आत्मा बना देने की…, इसलिए check and change…

• जब आप स्वयं का अर्थात् आत्मा को स्वच्छ बनाने का attention रख पुरूषार्थ करोगे, तो बहुत जल्दी ही बाप की मदद से flawless diamond बन पाओगे…।

अच्छा। ओम शांति।

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**IMPORTANT POINT*

*चारों ही subjects का result जो हैं, वह गुण स्वरूप और शक्ति स्वरूप बन seat पर set होना है। इसलिए आप बच्चों को इस तरफ विशेष attention देना है।*

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